Mahfooz khan

Sunday, June 14, 2020

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर समुदाय विशेष के लोगों ने मनाई ख़ुशी,दी भद्दी भद्दी गालियाँ और…

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर समुदाय विशेष के लोगों ने मनाई ख़ुशी,दी भद्दी भद्दी गालियाँ और…


                 


Mumbai Bollywood-आज का दिन ना केवल बॉलीवुड बल्कि पूरे देश को रु’ला दिया जब मशहूर फ़िल्म अदाकार सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के ख़ुद’कुशी करने की ख़बर सामने आयी।बताया जा रहा है की सुशांत सिंह राजपूत के बांद्रा स्थित उनके फ़्लैट से सुशांत का श’व उनके ही घर के अंदर लटकता मिला जिसकी जानकारी होने के बाद फ़िल्म जगत की बड़ी बड़ी हस्तियाँ सकते में आगयीं।

लेकिन समुदाय विशेष के कुछ उ’पद्रवियों ने सुशांत जैसे होनहार अदाकार की मौ’त पर भद्दी भद्दी गा’लियाँ देने के साथ साथ उनकी मौ’त पर ख़ुशी का भी इज़हार करने से गुरेज़ नही किया।इस दुःख की घड़ी में भी स’मुदाय विशेष के लोगों ने सुशांत सिंह राजपूत की मौ’त का जश्न मनाने में कोई कसर नही छोड़ी।ना केवल जश्न मनाते दिखे बल्कि सुशांत की मौ’त पर जहां देश का बड़ा तबका अफ़’सोस और दुः’ख जता रहा था तो वहीं दूसरी तरफ़ समुदाय विशेष से संबंध रखने वाले सोशल मीडिया पर सुशांत सिंह राजपूत पर अभ’द्र भाषा का प्रयोग करते हुए उनके म’र जाने की ख़ुशी मना रहे थे।समाज के इन न’फ़रती लोगों की ऐसी घ’टिया हरकत का विरो’ध भी हो रहा है।पत्रकार प्रशांत कन्नोजिया (Prashant Kannojia) ने अपने ट्विटर अकाउंट पर कुछ ऐसी ही पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है और लिखा कि ‘कोरो’ना का इलाज संभव है पर इस जहालत की कोई दवा नहीं’।

Wednesday, May 27, 2020

बिहार के मुजफ्फरपुर का ये वीडियो हैं जहां एक बच्चा रेलवे स्टेशन पर मां से खेल रहा, उसे जगा रहा

बिहार के मुजफ्फरपुर का ये वीडियो हैं जहां एक बच्चा रेलवे स्टेशन पर मां से खेल रहा, उसे जगा रहा
उसे नही पता उसकी मां हमेशा के लिए सो चुकी है, भीषण गर्मी में चार दिन से ट्रेन में भूखी प्यासी मां की मौत हो गयी l बच्चा मां के चादर के साथ खेल रहा था ,सोच रहा था कि अम्मा जगेगी और डाँटेगी -पिटेगी फिर दुलार भी करेगी। उसे क्या पता था कि ये चादर नही उनका कफ़न है और वो सदा के लिए अनाथ हो गया है । अहमदाबाद से कटिहार आने वाली ट्रेन श्रमिक एक्सप्रेस में चार दिनों से भूखी रहने के कारण इस महिला की मौत हो गई। ऐसे काम नही चलेगा सबको जिम्मेदारी तय करनी होगी, हम इस बच्चे के माँ को नही वापस कर सकते लेकिन हमारी मांग है कि गुजरात सरकार,बिहार सरकार, रेलवे,केंद्र सरकार इस बच्चे सहित तमाम भूख से मरने वाले लोगो और परिजनों से माफी मांगे और इस बच्चे के सम्पूर्ण भविष्य की जिम्मेदारी सरकार अपने स्तर से बेहतर ढंग से उठाए । भूख से मृत हर व्यक्ति के आश्रितों को 20 लाख मुआवजा दे सरकार और भविष्य में ऐसी घटना न होने की गारेंटी करे। एक सभ्य समाज मे भूख से लोगो का मरना सबसे बुरा है,हम एक असफल राष्ट्र की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं...😢😢

Thursday, May 21, 2020

जी न्यूज में कोरोना संक्रमित कर्मचारियों की संख्या 29 से बढ़कर 89 आज शाम तक पहुंच चुकी है।

जी न्यूज में कोरोना संक्रमित कर्मचारियों की संख्या 29 से बढ़कर 89 आज शाम तक पहुंच चुकी है। देश में कई ऐसे जिले और प्रदेश हैं जिनमें कोरोना मरीजों की संख्या जी न्यूज की संख्या से कम है। कुलमिलाकर जी न्यूज कोरोना का नया हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। इन 89 लोगों से अन्य कितने लोग संक्रमित हुए होंगे अंदाजा मुश्किल है। लेकिन इसमें इन 89 लोगों की कोई अधिक गलती नहीं है, कोई जानबूझकर तो महामारी को न्यौता नहीं देगा, लेकिन एक कम्पनी में 89 कर्मचारियों का संक्रमित हो जाना कोई सामान्य घटना नहीं है। 89 की संख्या जी न्यूज के प्रबंधन में एक बड़ी लापरवाही की तरफ इशारा कर रही है। सुधीर चौधरी जी न्यूज में एंकर होने के अलावा चैनल में सबसे बड़ी जिम्मेदारी यानी एडिटर इन चीफ पोस्ट पर भी हैं। मैनेजमेंट में भी उनका बराबर का हिस्सा है। एक मीडिया वेबसाइट न्यूजलाउंड्री की रिपोर्ट के अनुसार सुधीर चौधरी को जब कुछ कर्मचारियों में संक्रमण के लक्षणों के बारे में पता चला तो उन्होंने कहा कि चाहे जो हो, शो चलते रहना चाहिए, शो बन्द नहीं होना चाहिए। साफ है शुरुआती लक्षणों को ही नजरअंदाज कर दिया गया। धीरे धीरे बाकी लोग भी संक्रमण की गिरफ्त में आते गए। सिर्फ इसलिए कि तिहारी का शो चलता रहना चाहिए। इसका परिणाम आज ये हुआ कि कोरोना मरीजों की संख्या 29 से बढ़कर 66 और फिर 89 पहुंच चुकी है। आगे कितनी पहुंचेगी मालूम नहीं। अभी खबर ये भी है कि संख्या 4 और बढ़कर 95 पहुंच चुकी है।
     

सुधीर चौधरी और जी न्यूज के मैनेजमेंट ने न केवल अपने कर्मचारियों की हेल्थ के साथ कम्प्रोमाइज किया है बल्कि देश के अन्य नागरिकों की हेल्थ के साथ भी कम्प्रोमाइज किया है। ऐसे असंवेदनशील मैनेजमेंट पर तुंरत कार्यवाई करते हुए कम्पनी सील कर देनी चाहिए। DNA जैसा जहरीला शो कोई इशेंशियल सर्विसेज में नहीं  आता है जिसके कारण सैंकड़ों कर्मचारियों की जान को दाव पर लगा दिया जाए। कर्मचारियों की जान क्या इतनी सस्ती लगी कि पता चलने के बावजूद कर्मचारियों को ऑफिस आने के लिए बाध्य किया जाता रहा।

कायदे से जैसे ही दो-एक कर्मचारियों का पता चला था तभी उनके सम्पर्क में आने वाले सभी कर्मचारियों को क्वारंटाइन किया जाना चाहिए था। लेकिन वे कर्मचारी ही तो तिहारी  का शो लिखते थे, उन्हें ही क्वारंटाइन कर दिया जाता तो सुधीर तिहारी का जहर फैलाने वाला शो कैसे आता? सरकार को डिफेंड कैसे किया जाता? मुसलमानों को कोरोना के लिए जिम्मेदार कैसे ठहराया जाता?

एक बात सामान्य सी है, जो आदमी एक वर्ग विशेष के लिए जहर फैला सकता है उसके अंदर अपने कर्मचारियों के लिए संवेदनाएं होंगी इसकी कहीं कोई गुंजाइश नहीं है। यदि सरकार इस देश के नागरिकों, कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर सच में चिंतित है, तो ऐसे चैनल के मैनेजमेंट, एचआर और मालिक पर तुरंत कार्यवाई की जानी चाहिए।

Sunday, May 17, 2020

आज से करीब बारह तेरह साल पहले एक राजनैतिक विश्लेषक ने राहुल से पूछा था, अगर कांग्रेस पर लगे हाईकमान के ढक्कन को खोल दिया जाये तो क्या होगा ?

आज से करीब बारह तेरह साल पहले एक राजनैतिक विश्लेषक ने राहुल से पूछा था, अगर कांग्रेस पर लगे हाईकमान के ढक्कन को खोल दिया जाये तो क्या होगा ? ये तस्वीर उस सवाल का जवाब है। इस तस्वीर पर कई लोगो ने अपनी राय रखी.. सबको पढ़ने के बाद ही इस तस्वीर पर लिख रहा हूं। सुखदेव विहार फ्लाईओवर के नीचे बैठे इस सख्स ने प्रवासी मजदूरों से बीच सड़क पर बिना किसी ताम झाम के साथ मुलाकात कर, संजय-इन्दिरा और राजीव की मृत्यु के बाद प्लास्टिक की बोतल में बंद पड़े कांग्रेस हाईकमान के ढक्कन को खोल दिया है ।

राहुल को पसंद-नापसंद करने की सबकी अपनी वजहें हो सकती है। मेरी अपनी है लेकिन आपकी वजहें जरूर आपको वॉट्सएप पर भेजी गई होंगी.. जैसे उनके नाम पर चुटकुले बनाकर हंसने की वजहें, उनको पप्पू कहकर उनका मज़ाक बनाने की वजहें, उनके भाषणों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की वजहें इत्यादि...

आप हंस लीजिए, जितना चाहे मजाक भी बना लीजिए, तब तक  बनाइये जब तक आप खुद एक मज़ाक न हो जाएं ।.. लेकिन अभी के दौड़ में बस ये याद रखिए कि राहुल गांधी विपक्ष के एकमात्र ऐसे नेता है जो सरकार से आपके लिए लड़ रहे है। देश के आर्थिक मुद्दों पर, स्वास्थ्य कर्मियों को मास्क और किट मुहैया कराने के मुद्दों पर, किसानों को मुआवजा और फसल का दाम देने के मुद्दों पर, राज्यों के बाहर फंसे प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के मुद्दों पर, मध्यम वर्ग की जरूरतों से लेकर छोटे दुकानदारों को एक्स्ट्रा पैकेज और टैक्स में छूट देने तक राहुल गांधी ने सरकार को सहयोग और सलाह देने में अपनी ओर से कोई कमी नही होने दी ।


वॉट्सएपिया विरोध के कारण आप भले  कोई भी नाम रखिये मगर यह रहेंगे राहुल गाँधी ही। वहीं राहुल गांधी जी कैम्ब्रिज में पढ़ने के बाद भी भारत की मूल संस्कृति नहीं भूल पाए.. वही राहुल जिन्होंने इस देश के लिए अपने पिता की लाश को चिथरों में देखा था। वही राहुल जिसकी मां को आज भी विदेशी कहकर बदनाम किया जाता है।

ख़ैर, अगर ये पप्पू है.. तो देश को ऐसे कई पप्पुओं की जरूरत है। मजदूरों से मिलने का यह तरीका अगर ड्रामेबाजी लगता है तो एसी कमरे में बैठे मन की बात करने वाले हर उस जुम्लेबाज को ड्रामेबाज़ बनना चाहिए और बीच सड़क पर आकर देश की आवाम से मुखातिब होना चाहिए।


Saturday, May 16, 2020

नेता हो तो राहुल गांधी जेसा।दिल जीत लिया लोगो का।




 



कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को दिल्ली में प्रवासी मजदूरों के साथ बातचीत की. ये मजदूर पैदल अपने घरों को लौट रहे थे. राहुल गांधी ने दिल्ली के सुखदेव विहार फ्लाईओवर के पास इन मजदूरों के साथ बैठकर बातचीत की और उनका हाल जाना. जिसके बाद कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इन मजदूरों को उन्हें अपने घरों तक ले जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की.

काँग्रेस के साथी कोई देखे या न देखे आप राहुल जी कि प्रेस वार्ता को जरूर देखें

काँग्रेस के साथी कोई देखे या न देखे आप राहुल जी कि प्रेस वार्ता को जरूर देखें
                                   राहुल गांधी के आर्थिक पर्यवेक्षण से आज मीडिया भी जबरदस्त प्रभावित दिखा..राहुल गांधी के आजके पर्यवेक्षण क्या थे..

💞 प्रेस मीट की सबसे हृदयस्पर्शी लाइन : बच्चे को जब भूख लगती है तब माँ बच्चे को खाना देती है, लोन नही..इससे बड़ा इकोनॉमिक स्टेटमेंट हो ही नही सकता..

● जनता कैशलेस है, जेब खाली है
● जेब खाली तो डिमांड नही है
● कारखाने बन्द है तो सप्लाई भी खत्म है
● इकॉनमी के सामने बहुत बड़ा खतरा है
● इस पैकेज से इकॉनमी बचने वाली नही है
● कोरोना के अलावा दूसरे रोगी को बचाना है

★★ राहुल का कहना है कि लोन "सप्लाई साइड" पर काम करता है और जेब मे पैसा "डिमांड साइड" पर काम करता है..पर सरकार को केवल सप्लाई साइड दिख रही है..इंडस्ट्री बिना डिमांड लोन क्यो लेगी? 100% सही..

◆ राहुल समाधान भी बता रहे है..
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● जनता के लिए सबसे बड़ा पैकेज क्या है?
● जनता काम पर लौटे यही "असली पैकेज" है
● भारत 100% लॉकडाउन सम्भव नही
● मनरेगा को 200 दिन का बनाइये
● टेम्पोररी NYAY योजना लागू कीजिये

◆ विश्व मे जितने भी पैकेज की घोषणा हुई है
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● उसका 35% डायरेक्ट कैश है..
● 40% हिस्सा किसान और मजदूरों को है
● रूरल मार्केट को एक्टिव किया गया है..
● क्योंकि पूरे विश्व मे गांव कोरोना मुक्त है

मोदी चाहता है कि पानी मे पकौड़े तल लिए जाए..आज मीडिया के दम पर कुछ भी प्रचार करो, पर जिस दिन बगावत होगी, रास्तो पर दौड़ाया जाएगा ये तय है..

Wednesday, May 13, 2020

मौत का आना तो तय है मौत आएगी मगर आप के आने से थोड़ी ज़िंदगी बढ़ जाएगी

मौत का सामना तो एक न एक दिन सभी को करना ही है लेकिन इस सच्चाई को जान कर भी लोग भय खाते हैं। इसका दूसरा पहलू यूं भी है कि कई बार ज़िंदगी ही मौत जैसी लगती है। शायरों ने इस पर क्या कहा जानें इन शायरी के साथ

तन को मिट्टी नफ़स को हवा ले गई
मौत को क्या मिला मौत क्या ले गई
- हीरा देहलवी

मौत अंजाम-ए-ज़िंदगी है मगर
लोग मरते हैं ज़िंदगी के लिए
- अज्ञातजब तलक रहे जीता चाहिए हँसे बोले
आदमी को चुप रहना मौत की निशानी है
- ताबाँ अब्दुल हई

हम चाहते थे मौत ही हम को जुदा करे
अफ़्सोस अपना साथ वहाँ तक नहीं हुआ
- वसीम नादिरमौत ही इंसान की दुश्मन नहीं
ज़िंदगी भी जान ले कर जाएगी
- अर्श मलसियानी

हिज्र-ए-जानाँ में जी से जाना है
बस यही मौत का बहाना है
- मर्दान अली खां राना

मुझे अब मौत बेहतर ज़िंदगी से
वो की तुम ने सितमगारी कि तौबा
- हक़ीर

किसी के क़दमों से रस्ते लिपट के रोया किए
किसी की मौत पे ख़ुद मौत हाथ मलती रही
- अदनान मोहसिन

ज़िंदगी ने लूटा है ज़िंदगी को दानिस्ता
मौत से शिकायत क्या मौत का बहाना था
- नसीम शाहजहाँपुरी

मौत का आना तो तय है मौत आएगी मगर
आप के आने से थोड़ी ज़िंदगी बढ़ जाएगी
- मुनव्वर राना

मौत आती है तुम न आओगे
तुम न आए तो मौत आई है
- फ़ानी बदायुनी