Mahfooz khan

Sunday, May 17, 2020

आज से करीब बारह तेरह साल पहले एक राजनैतिक विश्लेषक ने राहुल से पूछा था, अगर कांग्रेस पर लगे हाईकमान के ढक्कन को खोल दिया जाये तो क्या होगा ?

आज से करीब बारह तेरह साल पहले एक राजनैतिक विश्लेषक ने राहुल से पूछा था, अगर कांग्रेस पर लगे हाईकमान के ढक्कन को खोल दिया जाये तो क्या होगा ? ये तस्वीर उस सवाल का जवाब है। इस तस्वीर पर कई लोगो ने अपनी राय रखी.. सबको पढ़ने के बाद ही इस तस्वीर पर लिख रहा हूं। सुखदेव विहार फ्लाईओवर के नीचे बैठे इस सख्स ने प्रवासी मजदूरों से बीच सड़क पर बिना किसी ताम झाम के साथ मुलाकात कर, संजय-इन्दिरा और राजीव की मृत्यु के बाद प्लास्टिक की बोतल में बंद पड़े कांग्रेस हाईकमान के ढक्कन को खोल दिया है ।

राहुल को पसंद-नापसंद करने की सबकी अपनी वजहें हो सकती है। मेरी अपनी है लेकिन आपकी वजहें जरूर आपको वॉट्सएप पर भेजी गई होंगी.. जैसे उनके नाम पर चुटकुले बनाकर हंसने की वजहें, उनको पप्पू कहकर उनका मज़ाक बनाने की वजहें, उनके भाषणों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की वजहें इत्यादि...

आप हंस लीजिए, जितना चाहे मजाक भी बना लीजिए, तब तक  बनाइये जब तक आप खुद एक मज़ाक न हो जाएं ।.. लेकिन अभी के दौड़ में बस ये याद रखिए कि राहुल गांधी विपक्ष के एकमात्र ऐसे नेता है जो सरकार से आपके लिए लड़ रहे है। देश के आर्थिक मुद्दों पर, स्वास्थ्य कर्मियों को मास्क और किट मुहैया कराने के मुद्दों पर, किसानों को मुआवजा और फसल का दाम देने के मुद्दों पर, राज्यों के बाहर फंसे प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के मुद्दों पर, मध्यम वर्ग की जरूरतों से लेकर छोटे दुकानदारों को एक्स्ट्रा पैकेज और टैक्स में छूट देने तक राहुल गांधी ने सरकार को सहयोग और सलाह देने में अपनी ओर से कोई कमी नही होने दी ।


वॉट्सएपिया विरोध के कारण आप भले  कोई भी नाम रखिये मगर यह रहेंगे राहुल गाँधी ही। वहीं राहुल गांधी जी कैम्ब्रिज में पढ़ने के बाद भी भारत की मूल संस्कृति नहीं भूल पाए.. वही राहुल जिन्होंने इस देश के लिए अपने पिता की लाश को चिथरों में देखा था। वही राहुल जिसकी मां को आज भी विदेशी कहकर बदनाम किया जाता है।

ख़ैर, अगर ये पप्पू है.. तो देश को ऐसे कई पप्पुओं की जरूरत है। मजदूरों से मिलने का यह तरीका अगर ड्रामेबाजी लगता है तो एसी कमरे में बैठे मन की बात करने वाले हर उस जुम्लेबाज को ड्रामेबाज़ बनना चाहिए और बीच सड़क पर आकर देश की आवाम से मुखातिब होना चाहिए।


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