Mahfooz khan

Wednesday, May 27, 2020

बिहार के मुजफ्फरपुर का ये वीडियो हैं जहां एक बच्चा रेलवे स्टेशन पर मां से खेल रहा, उसे जगा रहा

बिहार के मुजफ्फरपुर का ये वीडियो हैं जहां एक बच्चा रेलवे स्टेशन पर मां से खेल रहा, उसे जगा रहा
उसे नही पता उसकी मां हमेशा के लिए सो चुकी है, भीषण गर्मी में चार दिन से ट्रेन में भूखी प्यासी मां की मौत हो गयी l बच्चा मां के चादर के साथ खेल रहा था ,सोच रहा था कि अम्मा जगेगी और डाँटेगी -पिटेगी फिर दुलार भी करेगी। उसे क्या पता था कि ये चादर नही उनका कफ़न है और वो सदा के लिए अनाथ हो गया है । अहमदाबाद से कटिहार आने वाली ट्रेन श्रमिक एक्सप्रेस में चार दिनों से भूखी रहने के कारण इस महिला की मौत हो गई। ऐसे काम नही चलेगा सबको जिम्मेदारी तय करनी होगी, हम इस बच्चे के माँ को नही वापस कर सकते लेकिन हमारी मांग है कि गुजरात सरकार,बिहार सरकार, रेलवे,केंद्र सरकार इस बच्चे सहित तमाम भूख से मरने वाले लोगो और परिजनों से माफी मांगे और इस बच्चे के सम्पूर्ण भविष्य की जिम्मेदारी सरकार अपने स्तर से बेहतर ढंग से उठाए । भूख से मृत हर व्यक्ति के आश्रितों को 20 लाख मुआवजा दे सरकार और भविष्य में ऐसी घटना न होने की गारेंटी करे। एक सभ्य समाज मे भूख से लोगो का मरना सबसे बुरा है,हम एक असफल राष्ट्र की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं...😢😢

Thursday, May 21, 2020

जी न्यूज में कोरोना संक्रमित कर्मचारियों की संख्या 29 से बढ़कर 89 आज शाम तक पहुंच चुकी है।

जी न्यूज में कोरोना संक्रमित कर्मचारियों की संख्या 29 से बढ़कर 89 आज शाम तक पहुंच चुकी है। देश में कई ऐसे जिले और प्रदेश हैं जिनमें कोरोना मरीजों की संख्या जी न्यूज की संख्या से कम है। कुलमिलाकर जी न्यूज कोरोना का नया हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। इन 89 लोगों से अन्य कितने लोग संक्रमित हुए होंगे अंदाजा मुश्किल है। लेकिन इसमें इन 89 लोगों की कोई अधिक गलती नहीं है, कोई जानबूझकर तो महामारी को न्यौता नहीं देगा, लेकिन एक कम्पनी में 89 कर्मचारियों का संक्रमित हो जाना कोई सामान्य घटना नहीं है। 89 की संख्या जी न्यूज के प्रबंधन में एक बड़ी लापरवाही की तरफ इशारा कर रही है। सुधीर चौधरी जी न्यूज में एंकर होने के अलावा चैनल में सबसे बड़ी जिम्मेदारी यानी एडिटर इन चीफ पोस्ट पर भी हैं। मैनेजमेंट में भी उनका बराबर का हिस्सा है। एक मीडिया वेबसाइट न्यूजलाउंड्री की रिपोर्ट के अनुसार सुधीर चौधरी को जब कुछ कर्मचारियों में संक्रमण के लक्षणों के बारे में पता चला तो उन्होंने कहा कि चाहे जो हो, शो चलते रहना चाहिए, शो बन्द नहीं होना चाहिए। साफ है शुरुआती लक्षणों को ही नजरअंदाज कर दिया गया। धीरे धीरे बाकी लोग भी संक्रमण की गिरफ्त में आते गए। सिर्फ इसलिए कि तिहारी का शो चलता रहना चाहिए। इसका परिणाम आज ये हुआ कि कोरोना मरीजों की संख्या 29 से बढ़कर 66 और फिर 89 पहुंच चुकी है। आगे कितनी पहुंचेगी मालूम नहीं। अभी खबर ये भी है कि संख्या 4 और बढ़कर 95 पहुंच चुकी है।
     

सुधीर चौधरी और जी न्यूज के मैनेजमेंट ने न केवल अपने कर्मचारियों की हेल्थ के साथ कम्प्रोमाइज किया है बल्कि देश के अन्य नागरिकों की हेल्थ के साथ भी कम्प्रोमाइज किया है। ऐसे असंवेदनशील मैनेजमेंट पर तुंरत कार्यवाई करते हुए कम्पनी सील कर देनी चाहिए। DNA जैसा जहरीला शो कोई इशेंशियल सर्विसेज में नहीं  आता है जिसके कारण सैंकड़ों कर्मचारियों की जान को दाव पर लगा दिया जाए। कर्मचारियों की जान क्या इतनी सस्ती लगी कि पता चलने के बावजूद कर्मचारियों को ऑफिस आने के लिए बाध्य किया जाता रहा।

कायदे से जैसे ही दो-एक कर्मचारियों का पता चला था तभी उनके सम्पर्क में आने वाले सभी कर्मचारियों को क्वारंटाइन किया जाना चाहिए था। लेकिन वे कर्मचारी ही तो तिहारी  का शो लिखते थे, उन्हें ही क्वारंटाइन कर दिया जाता तो सुधीर तिहारी का जहर फैलाने वाला शो कैसे आता? सरकार को डिफेंड कैसे किया जाता? मुसलमानों को कोरोना के लिए जिम्मेदार कैसे ठहराया जाता?

एक बात सामान्य सी है, जो आदमी एक वर्ग विशेष के लिए जहर फैला सकता है उसके अंदर अपने कर्मचारियों के लिए संवेदनाएं होंगी इसकी कहीं कोई गुंजाइश नहीं है। यदि सरकार इस देश के नागरिकों, कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर सच में चिंतित है, तो ऐसे चैनल के मैनेजमेंट, एचआर और मालिक पर तुरंत कार्यवाई की जानी चाहिए।

Sunday, May 17, 2020

आज से करीब बारह तेरह साल पहले एक राजनैतिक विश्लेषक ने राहुल से पूछा था, अगर कांग्रेस पर लगे हाईकमान के ढक्कन को खोल दिया जाये तो क्या होगा ?

आज से करीब बारह तेरह साल पहले एक राजनैतिक विश्लेषक ने राहुल से पूछा था, अगर कांग्रेस पर लगे हाईकमान के ढक्कन को खोल दिया जाये तो क्या होगा ? ये तस्वीर उस सवाल का जवाब है। इस तस्वीर पर कई लोगो ने अपनी राय रखी.. सबको पढ़ने के बाद ही इस तस्वीर पर लिख रहा हूं। सुखदेव विहार फ्लाईओवर के नीचे बैठे इस सख्स ने प्रवासी मजदूरों से बीच सड़क पर बिना किसी ताम झाम के साथ मुलाकात कर, संजय-इन्दिरा और राजीव की मृत्यु के बाद प्लास्टिक की बोतल में बंद पड़े कांग्रेस हाईकमान के ढक्कन को खोल दिया है ।

राहुल को पसंद-नापसंद करने की सबकी अपनी वजहें हो सकती है। मेरी अपनी है लेकिन आपकी वजहें जरूर आपको वॉट्सएप पर भेजी गई होंगी.. जैसे उनके नाम पर चुटकुले बनाकर हंसने की वजहें, उनको पप्पू कहकर उनका मज़ाक बनाने की वजहें, उनके भाषणों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की वजहें इत्यादि...

आप हंस लीजिए, जितना चाहे मजाक भी बना लीजिए, तब तक  बनाइये जब तक आप खुद एक मज़ाक न हो जाएं ।.. लेकिन अभी के दौड़ में बस ये याद रखिए कि राहुल गांधी विपक्ष के एकमात्र ऐसे नेता है जो सरकार से आपके लिए लड़ रहे है। देश के आर्थिक मुद्दों पर, स्वास्थ्य कर्मियों को मास्क और किट मुहैया कराने के मुद्दों पर, किसानों को मुआवजा और फसल का दाम देने के मुद्दों पर, राज्यों के बाहर फंसे प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के मुद्दों पर, मध्यम वर्ग की जरूरतों से लेकर छोटे दुकानदारों को एक्स्ट्रा पैकेज और टैक्स में छूट देने तक राहुल गांधी ने सरकार को सहयोग और सलाह देने में अपनी ओर से कोई कमी नही होने दी ।


वॉट्सएपिया विरोध के कारण आप भले  कोई भी नाम रखिये मगर यह रहेंगे राहुल गाँधी ही। वहीं राहुल गांधी जी कैम्ब्रिज में पढ़ने के बाद भी भारत की मूल संस्कृति नहीं भूल पाए.. वही राहुल जिन्होंने इस देश के लिए अपने पिता की लाश को चिथरों में देखा था। वही राहुल जिसकी मां को आज भी विदेशी कहकर बदनाम किया जाता है।

ख़ैर, अगर ये पप्पू है.. तो देश को ऐसे कई पप्पुओं की जरूरत है। मजदूरों से मिलने का यह तरीका अगर ड्रामेबाजी लगता है तो एसी कमरे में बैठे मन की बात करने वाले हर उस जुम्लेबाज को ड्रामेबाज़ बनना चाहिए और बीच सड़क पर आकर देश की आवाम से मुखातिब होना चाहिए।


Saturday, May 16, 2020

नेता हो तो राहुल गांधी जेसा।दिल जीत लिया लोगो का।




 



कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को दिल्ली में प्रवासी मजदूरों के साथ बातचीत की. ये मजदूर पैदल अपने घरों को लौट रहे थे. राहुल गांधी ने दिल्ली के सुखदेव विहार फ्लाईओवर के पास इन मजदूरों के साथ बैठकर बातचीत की और उनका हाल जाना. जिसके बाद कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इन मजदूरों को उन्हें अपने घरों तक ले जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की.

काँग्रेस के साथी कोई देखे या न देखे आप राहुल जी कि प्रेस वार्ता को जरूर देखें

काँग्रेस के साथी कोई देखे या न देखे आप राहुल जी कि प्रेस वार्ता को जरूर देखें
                                   राहुल गांधी के आर्थिक पर्यवेक्षण से आज मीडिया भी जबरदस्त प्रभावित दिखा..राहुल गांधी के आजके पर्यवेक्षण क्या थे..

💞 प्रेस मीट की सबसे हृदयस्पर्शी लाइन : बच्चे को जब भूख लगती है तब माँ बच्चे को खाना देती है, लोन नही..इससे बड़ा इकोनॉमिक स्टेटमेंट हो ही नही सकता..

● जनता कैशलेस है, जेब खाली है
● जेब खाली तो डिमांड नही है
● कारखाने बन्द है तो सप्लाई भी खत्म है
● इकॉनमी के सामने बहुत बड़ा खतरा है
● इस पैकेज से इकॉनमी बचने वाली नही है
● कोरोना के अलावा दूसरे रोगी को बचाना है

★★ राहुल का कहना है कि लोन "सप्लाई साइड" पर काम करता है और जेब मे पैसा "डिमांड साइड" पर काम करता है..पर सरकार को केवल सप्लाई साइड दिख रही है..इंडस्ट्री बिना डिमांड लोन क्यो लेगी? 100% सही..

◆ राहुल समाधान भी बता रहे है..
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● जनता के लिए सबसे बड़ा पैकेज क्या है?
● जनता काम पर लौटे यही "असली पैकेज" है
● भारत 100% लॉकडाउन सम्भव नही
● मनरेगा को 200 दिन का बनाइये
● टेम्पोररी NYAY योजना लागू कीजिये

◆ विश्व मे जितने भी पैकेज की घोषणा हुई है
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● उसका 35% डायरेक्ट कैश है..
● 40% हिस्सा किसान और मजदूरों को है
● रूरल मार्केट को एक्टिव किया गया है..
● क्योंकि पूरे विश्व मे गांव कोरोना मुक्त है

मोदी चाहता है कि पानी मे पकौड़े तल लिए जाए..आज मीडिया के दम पर कुछ भी प्रचार करो, पर जिस दिन बगावत होगी, रास्तो पर दौड़ाया जाएगा ये तय है..

Wednesday, May 13, 2020

मौत का आना तो तय है मौत आएगी मगर आप के आने से थोड़ी ज़िंदगी बढ़ जाएगी

मौत का सामना तो एक न एक दिन सभी को करना ही है लेकिन इस सच्चाई को जान कर भी लोग भय खाते हैं। इसका दूसरा पहलू यूं भी है कि कई बार ज़िंदगी ही मौत जैसी लगती है। शायरों ने इस पर क्या कहा जानें इन शायरी के साथ

तन को मिट्टी नफ़स को हवा ले गई
मौत को क्या मिला मौत क्या ले गई
- हीरा देहलवी

मौत अंजाम-ए-ज़िंदगी है मगर
लोग मरते हैं ज़िंदगी के लिए
- अज्ञातजब तलक रहे जीता चाहिए हँसे बोले
आदमी को चुप रहना मौत की निशानी है
- ताबाँ अब्दुल हई

हम चाहते थे मौत ही हम को जुदा करे
अफ़्सोस अपना साथ वहाँ तक नहीं हुआ
- वसीम नादिरमौत ही इंसान की दुश्मन नहीं
ज़िंदगी भी जान ले कर जाएगी
- अर्श मलसियानी

हिज्र-ए-जानाँ में जी से जाना है
बस यही मौत का बहाना है
- मर्दान अली खां राना

मुझे अब मौत बेहतर ज़िंदगी से
वो की तुम ने सितमगारी कि तौबा
- हक़ीर

किसी के क़दमों से रस्ते लिपट के रोया किए
किसी की मौत पे ख़ुद मौत हाथ मलती रही
- अदनान मोहसिन

ज़िंदगी ने लूटा है ज़िंदगी को दानिस्ता
मौत से शिकायत क्या मौत का बहाना था
- नसीम शाहजहाँपुरी

मौत का आना तो तय है मौत आएगी मगर
आप के आने से थोड़ी ज़िंदगी बढ़ जाएगी
- मुनव्वर राना

मौत आती है तुम न आओगे
तुम न आए तो मौत आई है
- फ़ानी बदायुनी

Tuesday, May 12, 2020

प्रधानमंत्री का 8 बजे वाला भाषण सुनने से पहले पीएम केयर फंड के पीछे की इस कहानी को पढ़ जाना...

प्रधानमंत्री का 8 बजे वाला भाषण सुनने से पहले पीएम केयर फंड के पीछे की इस कहानी को पढ़ जाना...
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तमाम जानकारों का कहना है कि PM Care फंड ट्रांसपेरेंट नहीं है, इसकी जांच CAG नहीं कर सकता। जैसा कि खुद सरकार ने एक RTI के जबाव में साफ भी कर दिया है। RTI में कैग ने स्वयं कहा है कि हमें PM Care जांच करने का अधिकार नहीं है। अब आपके मन में आया होगा कि कैग से जांच होना ही क्यों जरूरी है, और आखिर ये कैग किस बला का नाम है। दरअसल कैग ( Comptroller and Auditor General of India) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के द्वारा नियुक्त ऐसी न्यूट्रल संस्था होती है जो सरकारी खर्चे का लेखा-जोखा रखती है, कि कहाँ-कहाँ  गड़बड़ हुई, कहाँ कितना पैसा खर्च हुआ, कैग इन्हीं सबका हिसाब रखती है, ऑडिट रखती है। कांग्रेस सरकार के समय कुछ कथित घोटाले भी कैग की जांच के बाद ही सामने आए थे। हालांकि उनमें से एकाध मामला बाद में कोर्ट में गलत  भी पाया गया। लेकिन आप इस उदाहरण से अंदाजा लगा सकते हैं कि यदि कैग के रूप में नियुक्त व्यक्ति की मंशा सही हो तो कैग कितनी शक्तिशाली स्वतंत्र संस्था के रूप में काम कर सकती है।

अब आते हैं कि PM cares पर, इस फंड की जांच को लेकर सरकार का कहना है कि इसकी जांच कैग नहीं कर सकती। लेकिन इसका ऑडिट एक थर्ड पार्टी द्वारा किया जाएगा। अब आपके मन में आया होगा कि ये थर्ड पार्टी ऑडिट टीम क्या बला है? सरकार का कहना है कि PM Care फंड के जो ट्रस्टी होंगे वही ऑडिट करने वाले लोगों को नियुक्त करेंगे.

हैं??????????

जिस संस्था की जांच की जानी वह संस्था ही अपने जांचकर्ताओं की नियुक्त करेगी? सीरियसली?

क्या ये हितों का टकराव नहीं है?

इसके भी आगे आपको जानना जरूरी है कि PM Cares के ट्रस्टी कौन होंगे जो इन जांचकर्ताओं को चुनेंगे। PM Care फंड की वेबसाइट पर लिखा हुआ है कि प्रधानमंत्री इस फंड के चेयरमैन होंगे, तीन केबिनेट मंत्री इसके मेम्बर होंगे, तीन केबिनेट मंत्री मतलब, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, और वित्त मंत्री। अब ये सब मेम्बर तीन और अन्य सदस्तों को चुनेंगे जो हेल्थ, रिसर्च, दानकर्ताओं, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल वर्क से जुड़े हुए हो सकते हैं। जैसे हेल्थ से बंदा चाहिए होगा तो संदीप पात्रा है ही, दानकर्ताओं में से एक बंदा चाहिए होगा तो अक्षय कुमार है ही, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में चाहिए तो चमचागिरी करने वाले तमाम रिटायर्ड डीएम और सचिव मिल ही जाने हैं।

कुलमिलाकर ये जो तीन अन्य मेम्बर भी चुने जाएंगे वे प्रधानमंत्री और अन्य तीन केबिनेट मंत्रियों के चहेते ही होंगे। इन सबको मिलाकर बनता है "PM Care फंड का Trust"।

अब ये ट्रस्ट ही डिसाइड करेगा कि इनके द्वारा खर्च किए गए पैसे को कौन सी संस्था ऑडिट करेगी? यानी कौन सी प्राइवेट, सस्ती सी भक्त टाइप, दो नम्बरी चार्टर्ड एकाउंटेंट संस्था को पकड़ कर फंड के खर्चे पर मोहर लगवानी है ये मोदी जी ही तय करेंगे, इससे आपको लगेगा कि जांच हो तो रही है। उधर सरजी पूरा खेल खेल चुके होंगे।

अब आते हैं कि सरकार का क्या तर्क है कि वह क्यों कैग पर जांच न करवाकर प्राइवेट लोगों द्वारा फंड की जांच करवा रही है?

सरकार का कहना है "चूंकि इसमें आने वाला पैसा दान का पैसा है इसलिए इसकी जांच कैग नहीं कर सकता। हमारी मर्जी है जिससे चाहे करवाएंगे"

अब आप थोड़ा आउट ऑफ द बॉक्स चलते हैं, इसी तरह  किसी भी तरह की आपातकाल से सम्बंधित एक फंड है, 1948 के टाइम से, इसका नाम है प्रधानमंत्री राहत कोष, अंग्रेजी में PM Relief Fund। आपको बता दूं जैसे PM Care में दान का पैसा आता है, बजट से नहीं आता, उसी तरह इसमें भी दान का ही पैसा आता है, बजट से कोई पैसा नहीं आता। इस फंड की जानकारी के सम्बंध में कैग ने बताया है कि वह भी प्रधानमंत्री राहत कोष की जांच नहीं करते। उसका भी थर्ड पार्टी ही करती है। करते नहीं हैं इसका मतलब ये नहीं है कि कैग PM Relief Fund की जांच नहीं कर सकते, वे जब चाहे सरकार से इस फंड के हिसाब के बारे में पूछ सकते हैं। जैसे कि उत्तराखंड आपदा के समय कैग ने इस फंड के हिसाब की जांच की थी। इस बयान की पुष्टि आपको द वायर नाम की अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट पर मिल जाएगी। इस लिहाज से रिलीफ फंड, PM Care फंड से अधिक ट्रांसपेरेंट है।

अब एक अफवाह के बारे में भी जान लीजिए। भाजपा अवैतनिक आईटी सेल द्वारा एक अफवाह फैलाई जा रही है कि PM Care फंड इसलिए बनाया है क्योंकि प्रधानमंत्री रिलीफ फंड कांग्रेस के टाइम बना था, इसलिए इसकी चेयरमैन कांग्रेस की अध्यक्ष होती है। तो आईटी सेल का ये दावा देशवासियों को भ्रमित करने से अधिक नहीं है। रिलीफ फंड का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं। उन्हीं के निर्देशों के आधार खर्चा किया जाता है। इस तरह इस समय रिलीफ फंड के चैयरमैन अप्रिय प्रधानमंत्री मोदी हैं। उनकी मर्जी के बिना इस फंड से चवन्नी खर्च नहीं की जा सकती। इसलिए भाजपा आईटी सेल का दावा हजारों पिछले दावों की तरह झूठा निकला।

एक और बात कि प्रधानमंत्री राहत कोष में ऑलरेडी 2200 करोड़ रूपए ऐसे ही पड़े हैं, उनका कोई यूज नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री चाहते तो कोरोना से लड़ाई में उनका उपयोग कर सकते थे, लेकिन मालूम नहीं प्रधानमंत्री ने ऐसा क्यों नहीं किया।

अब अगला सवाल ये कि प्रधानमंत्री के पास पहले ही प्रधानमंत्री के नाम से ही एक आपातकाल कोष था तो फिर प्रधानमंत्री ने एक दूसरा कोष क्यों बनाया? और यदि बनाया भी है तो उसकी जांच के लिए प्राइवेट लोगों को क्यों रखने की बात क्यों कही जा रही जबकि प्रधानमंत्री तो अपने भाषणों में "पारदर्शिता" का जिक्र हमेशा करते हैं। क्या प्रधानमंत्री ने पारदर्शिता के सिद्धांत को महामारी के काल में श्रद्धाजंलि दे दी है?

अब आते हैं कि क्या सच में PM Care में आया पैसा दान किया हुआ है? उसमें कोई भी सरकारी पैसा नहीं है?

तो अब इसकी हकीकत भी सुनिए।

-फाइनेंसियल एक्सप्रेस की 31 अप्रैल की एक रिपोर्ट के अनुसार 8 स्टील मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कहने पर स्टील मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली 8 सरकारी कम्पनियों(PSUs) ने 267.55 करोड़ रुपए PM Care फंड में कंट्रीब्यूट किए हैं। ये 8 PSU-  SAIL, RINL, NMDC, MOIL, MECON, KIOCL, MSTC, and FSNL आदि हैं।

- फाइनेंसियल एक्सप्रेस की ही 4 अप्रैल की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकारी कम्पनियों ने पीएम केयर फंड में करीब 2500 करोड़ रुपए से अधिक पैसे कॉन्ट्रिब्यूशन करने का निर्णय लिया है।

द प्रिंट की 4 अप्रैल की एक रिपोर्ट के अनुसार PM Care फंड में करीब 500 करोड़ रूपए से अधिक पैसे देश की सेना, नेवी, एयरफोर्स, डिफेंस की सरकारी कंपनियों और रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों से आए हैं।

द हिन्दू बिजनेस लाइन की 31 मार्च की खबर के अनुसार Ministries of Power & MNRE ने 925 करोड़ रूपए देने का निर्णय लिया है।

ये लिस्ट बहुत लंबी है, लाखों सरकारी कर्मचारियों का वेतन काटकर उसे दान का नाम दे दिया गया है।

द वायर पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर ने सभी कर्मचारियों से पैसे तो लिए रिलीफ फंड के नाम पर और दान कर दिए PM Care फंड में।

ये छोटी मोटी रकम नहीं है। हजारों करोड़ की रकम है। ये आपका पैसा है, आपके प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष करों का पैसा है। सरकारी कम्पनियों का पैसा किसी पार्टी का पैसा नहीं होता, वह प्रधानमंत्री और उसके मंत्रियों का पैसा भी नहीं होता। वह जनता का पैसा है। और जनता के पैसे की जांच प्रायवेट हाथों में नहीं दी जा सकती। उसकी जांच उसी तरीके से की जा सकती है जिस तरह से संविधान में वर्णित है।

संविधान के अनुच्छेद 148 में बाकायदा CAG संस्था का जिक्र है। जो सरकारी पैसे का लेखा जोखा रखेगी, जो सरकारी पैसे पर नजर रखेगी कि कुछ भी गड़बड़ न हो जाए। PM Care फंड में हजारों करोड़ रुपया मंत्रालयों, PSUs और सरकारी कर्मचारियों के वेतन का लगा हुआ है। इसका ऑडिट प्राइवेट हाथों द्वारा कैसे किया जा सकता है? PM Care फंड में संकट के समय देश के नाम पर हजारों करोड़ रुपया लिया गया है। हजारों कम्पनियों ने मन भर के दान दिया, सरकारी पैसा भी लगा है, इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री तमाम मंचों से ट्रांसपेरेंसी की बात करते हैं। फिर इस मामले में गड़बड़ी क्यों कर रहे हैं? कायदा से प्रधानमंत्री को कैग को ही अधिक उत्तरदायित्व, पारदर्शी बनाना चाहिए था, लेकिन प्रधानमंत्री ने तो उल्टा कैग से काम ही छीन लिया। ये सरासर भ्रष्टाचार है, अनैतिक है। संकट के इस समय में इतनी असंवेदनशीलता नहीं दिखानी चाहिए थी।

पीएम मोदी आज रात 8 बजे देश को करेंगे संबोधित

पीएम मोदी आज रात 8 बजे देश को करेंगे संबोधित


कोरोनावायरस (Coronavirus) संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) आज रात 8 बजे देश को संबोधित करेंगे. पीएम मोदी का यह संबोधन लॉकडाउन को लेकर सोमवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक के कुछ घंटों बाद होगा. सूत्रों की ओर से सोमवार को दी गई जानकारी के मुताबिक, देश में 17 मई के बाद भी लॉकडाउन बढ़ाया जा सकता है. मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में लॉकडाउन आगे किस रूप में होगा इसके लिए प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों से 15 मई तक सुझाव मांगे हैं. सूत्रों ने कहा कि कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में रात्रि कर्फ्यू और सीमित परिवहन व्यवस्था जैसे प्रतिबंध भी लागू रह सकते हैं.

Saturday, May 9, 2020

सूरत में बीजेपी के नेता की दादागिरी, गांव भेजने के नाम पर 1.16 लाख वसूले, टिकट मांगा तो फोड़ा सिर

सूरत में बीजेपी के नेता की दादागिरी, गांव भेजने के नाम पर 1.16 लाख  वसूले, टिकट मांगा तो फोड़ा सिर
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ये है भाजपा का “गुजरात माडल” सूरत के भाजपा नेता ने मज़दूरों से 1.16 लाख रुपये किराये के नाम पर वसूल लिया,टिकट भी नही दिया, पैसा मँगाने पर पीटकर लहुलुहान कर दिया ये गरीब मज़दूर तुम्हें माफ़ नही करेगा l

प्रधानमंत्री के गुजरात से बेहद घृणित करने वाली खबर आ रही है। टीवी9 गुजरात चैनल ने अपनी एक रिपोर्ट प्रसारित की है जिसमें प्रवासी मजदूरों को टिकट बेचने में दलाली खाई जा रही है। रिपोर्ट में एक्सपोज किया है कि कैसे रेलवे अधिकारियों और सूरत नगरनिगम के अधिकारियों ने टिकट में दलाली के लिए साठगांठ की है जिसमें बीजेपी के लोकल नेता दलाली खा रहे हैं। राजेश वर्मा नाम से एक बीजेपी का नेता है जो म्युनिसिपेलिटी के काउंसलर अमित राजपूत के साथ मिलकर टिकट बेच रहा है। ये एक पूरा रैकेट है जो ब्लैक में टिकट बेचने का काम कर रहा है। गुजरात से झारखंड जाने वाली टिकटों को 2-2 हजार रुपए में बेचा जा रहा है जबकि इनकी सामान्य कीमत 1 हजार रुपए होती है।

खबर आ रही है कि मजदूरों के एक समूह से बीजेपी नेता राजेश वर्मा ने 1 लाख, 16 हजार रुपए ऐंठ लिए। जब एक प्रवासी मजदूर ने टिकटों के डबल पैसे लिए जाने का विरोध किया तो बीजेपी नेता ने मजदूर की इतनी पिटाई की कि सर ही फूट गया।

एक दिन पहले ही इकोनॉमिक टाइम्स पर एक रिपोर्ट आई थी जिसमें बताया गया था कि किस कदर ट्रैन टिकट हांसिल करने की पूरी प्रोसेज एक हेक्टिक प्रोसेज बन गई है। मजदूरों को पहले रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है, जिसका अप्रूवल रिसीविंग स्टेट के द्वारा दिया जाता है।सोचिए  मजदूर जो ईंट भट्ठों पर काम करते हैं, जो लेबर का काम करते हैं, मंडियों में काम करते हैं कैसे-कैसे रजिस्ट्रेशन करवा पा रहे होंगे? टिकट कन्फर्म हो जाने के बाद मजदूरों को मेडिकल भी करवाना होता है। मेडिकल करवाने में बड़े स्तर पर धांधली की खबरें भी मीडिया में आ रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया के बाद जाकर मजदूरों को ट्रेन की टिकट मिल पा रही है।

आप सोचिए महामारी के समय में, क्या मजदूरों को घर पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं बनती थी? 46 दिन से अधिक हो गया, बिना कमाए कितना पैसा बचा होगा मजदूरों पर? आप कल्पना भी नहीं कर सकते मजदूर क्या क्या बेचकर टिकट का इंतजाम कर पा रहे होंगे। ऊपर से सरकार के चमचों ने मजदूरों का खून पीना  भी शुरू कर दिया है। ये बेहद घृणा भरने वाली खबर है।


Friday, May 8, 2020

सुबह से समझ ही नहीं आ रहा कि क्या लिखें, क्या कहें! सब कुछ जो कहा जाना चाहिए वो तो कह दिया है।

सुबह से समझ ही नहीं आ रहा कि क्या लिखें, क्या कहें! सब कुछ जो कहा जाना चाहिए वो तो कह दिया है।


स्तब्ध हूँ। बस सोच रहा हूँ कि कितने परेशान होंगे वो 17 लोग जो रेलवे ट्रेक पर चलकर सैकड़ों किलोमीटर दूर अपनों के पास जा रहे थे। कितने थके होंगे जब उन्होंने सोचा होगा कि रेल की सिल्लियों पर कुछ देर आराम कर लें। आगे की यात्रा में भूखा न रहना पड़े इसलिए सोते वक्त अपने बगल में ही रोटी संभाल कर रखी थी।

लेकिन उन थके हुए बेसहारा मजदूरों को क्या पता था कि रेल की जिन सिल्लियों पर वो अपनी थकान मिटाने की सोच रहे हैं, वही उनकी अर्थी बन जायेगा।

सरकार कहेगी ये तो एक दुर्घटना है। हम जाँच करवाएंगे। किसी को छोड़ा नहीं जाएगा। ड्राइवर की गलती, किसी रेल कर्मचारी की गलती तो मजदूरों की गलती निकाल ली जाएगी। जब कि हम सब जानते हैं कि ये एक isolated accident नहीं है। एक परिस्थिति है जो पिछले कई दिनों से बनाई जा रही थी.. अंग्रेज़ी में जिसे कहते हैं murder by design..

औरंगाबाद में हुई दर्दनाक घटना से देश का हर "इंसान" हिल गया है। ये सिर्फ उन 15 बेसहारा मजदूरों की मौत नहीं है। असल में हम सब आज थोड़ा थोड़ा मर गए हैं। ये हर भारतीय की मौत है। #हमारी_मौत है!

और जो अब भी महसूस नहीं कर पा रहे या व्यथित नहीं हैं उनकी संवेदनाएं मर गयी हैं, इंसानियत मर गयी है। वो तो जीवित होकर भी मरे हुए हैं..

क्योंकि अब और क्या होगा जिसके बाद हमारी संवेदनाएं जगेंगी?

अब और क्या होगा जिसके बाद हम गलत को गलत कहना शुरू करेंगे?

अब और क्या होगा जिसके बाद हमें एक देश और समाज के तौर पर शर्म आनी शुरू होगी?

अब और क्या होगा जिसके बाद हम सत्ता में बैठे लोगों को उनके अपराध का एहसास कराएंगे?

ट्रेन पर चढ़ने नही दिया लेकिन ट्रेन खुद चढ़ गई

ट्रेन हादसा में 16 लोगों की मौत ने पूरे हिंदुस्तान को हिला कर रख दिया है




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Aurangabad: 16 migrants returning to MP run over by train, inquiry ordered

The migrant labourers walking to reach their homes in Madhya Pradesh were run over by a goods train early in the morning in16 migrant labourers returning to their homes in Madhya Pradesh were mowed down by a goods train in Aurangabad

The incident occured around 5:30 am in the morning on the Auranngabad-Jalna railway line

An official said the migrant workers fell asleep on the tracks due to exhuastion caused by the long journey

At least 16 migrant labourers returning to Madhya Pradesh amid the nationwide lockdown died after being run over by a goods train in Maharashtra’s Aurangabad on Friday.
While 15 deaths were initially reported, the death toll went up after an injured labourer succumbed to injuries. The incident occurred at around 5:30 am on the Aurangabad-Jalna railway line.
An official told news agency PTI that the labourers, who had been walking along the railway tracks fell asleep due to exhaustion. The official added that they were mowed down by the train early in the morning.

 Maharashtra's Aurangabad.

Wednesday, May 6, 2020

Coronavirus No Case : झारखंड में कोरोना के हुए 35 दिन, कुल मामले 122, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कब-कब नहीं आया कोरोना का नया केस ?


रांची : झारखंड (Jharkhand) में लॉकडाउन (Lockdown) का आज 44 वां दिन है और कोरोना के 35 दिन हो गये. अब तक 122 कोरोना पॉजिटिव (Coronavirus positive) पाये गये हैं. इनमें 28 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि तीन मरीजों की जान (Coronavirus Death) जा चुकी है. फिलहाल एक्टिव केस 84 रह गये हैं. रेड जोन रांची (Red Zone Ranchi) के हॉटस्पॉट (Hotspot) हिंदपीढ़ी (Hindpiri) में सर्वाधिक 67 कोरोना पॉजिटिव पाये जा चुके हैं. इस दौरान तीन दिन ऐसे भी आए, जब राज्य में कोरोना का एक भी नया मामला (Coronavirus No Case) सामने नहीं आया. पढ़िए गुरुस्वरूप मिश्रा की रिपोर्ट.झारखंड में कोरोना के 35 दिन

सवा तीन करोड़ की आबादी वाले झारखंड में लॉकडाउन के 43 दिन बीत गये हैं. आज 44वां दिन है. लॉकडाउन 3.0 का दूसरा दिन है. झारखंड में कोरोना का पहला केस 31 मार्च को आया. जब रेड जोन रांची के हॉटस्पॉट बन चुके हिंदपीढ़ी से एक 22 वर्षीया मलेशियाई युवती कोरोना पॉजिटिव पायी गयी थी, जो दिल्ली में तबलीगी जमात में शामिल होकर हिंदपीढ़ी में आकर रह रही थी. फिलहाल ये युवती स्वस्थ हो चुकी है. 31 मार्च से 5 मई यानी पिछले 36 दिनों में राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 122 हो गयी है. तीन की मौत हो चुकी है, जबकि अच्छी खबर ये है कि 28 कोरोना संक्रमित स्वस्थ हो गये हैं. इन सबके बीच सुकून देने वाली बात ये रही कि तीन दिन ऐसे भी रहे, जब राज्य के किसी भी जिले से कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट नहीं आयी. दो दिन राहत के बाद 5 मई को रांची के हॉटस्‍पॉट हिंदपीढ़ी से 7 कोरोना के नये केस आये.

Tuesday, May 5, 2020

सिद्धार्थनगर में फिर फूटा कोरोना बम...

ब्रेकिंग
सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर में फिर फूटा कोरोना बम...
जिले में मिले दस कोरोना पॉजिटिव मरीज
जिले में कोरोना पाजेटिव मरीज़ मिलने से मचा हड़कंप।
सदर तहसील के गंगा पब्लिक स्कूल में मिले सभी कोरोना पाजेटिव मरीज थे क्वारंटीन।



पिछले दिनों जनपद  में 2 व्यक्ति पाये गये थे कोरोना पाजिटिव।
जिले में कुल कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ कर हुई 12  ऐसे राहे  अगर आलात तो बढ़ सकतें हैं  मुश्किलें




Monday, May 4, 2020

नाम - सफूरा ज़रगर जामिया विश्वविद्यालय में रिसर्चर छात्रा, जिसके गर्भ में एक बच्चा है, सरकार ने UAPA terror कानून के बहाने

नाम - सफूरा ज़रगर
जामिया विश्वविद्यालय में रिसर्चर छात्रा, जिसके गर्भ में एक बच्चा है, सरकार ने UAPA terror कानून के बहाने गिरफ्तार कर रखा है सफूरा को कोई जमानत नहीं मिली है। स्टेटस ये है कि एक गर्भवती महिला तिहाड़ जेल के अंदर है।
कारण - संसदीय कानून CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन.....
जरूर आपको हिचकिचाहट होगी उसके समर्थन में लिखने में। .खैर छोडिय आवाज उठाने पर आप Anti-HINDU,राष्ट्रविरोधी इत्यादि से troll कर दिय जायेंगे क्योंकि वह स्त्री ( माँ) जो की कह सकते है , एक ऐसा विश्वविद्यालय से संबंध रखती है जिसे आज के परिवेश मे उसे देशद्रोही का अड्डा, हिन्दुविरोधी साबित करना चाहती है सत्ता औऱ उसके नुमाईंदे. यह वही विश्विद्यालय है जिसे एक वक़्त गाँधी जी भीख मांगकर भी चलाना चाहते थे. ख़ासकर उस विश्वविद्यालय 

जिसके नाम का अर्थ ही आजादी होती है,वैसे भी #आजादी शब्द नासूर लगती 
लोकतंत्र के कथित तानाशाही विचारधारा को। हाँ आपको एक और मुश्किल हो सकती है उसकी आवाज उठाने में क्योंकि उसका धर्म आपको शायद पता चल गया होगा-मुस्लिम। या फिर इस पितृसत्तात्मक समाज ये नहीं चाहता हो। औऱ यह भी की वह कश्मीर से है.. खबर तो यहां तक फैलाया गया है की अविवाहित होने के बावजूद
प्रेग्नेंट है. उनकी निकाह हो चुकी है. हाँ क्या दिक़्क़त है  बिना विवाह के बच्चे होना. उसकी अपनी आजादी है. वह कोई 17 साल की नाबालिग नहीं है , वह वयस्क हैं और उसे संवैधानिक अधिकार भी हैं।
मुझे तनिक भी नहीं है डर इस बात की। . क्योंकि मैं #सफुरा में विश्वास रखता हूँ वो मुस्लिम हैं या हिन्दू उसमें नहीं .उसे रोजे के पहले दिन ही गिरफ्तार कर "तिहाड़ जेल" में डाल दिया गया है वजह यह थी की "सफुरा"उस कमिटी  Jamia Coordination Committee (JCC) जिसने पिछले महीनो में शांतिपूर्ण आंदोलन कई सप्ताह तक किया था जनविरोधी,संविधानविरोधी CAA/NRC के खिलाफ। वह एक मौन की मुखर घोस थी जिसके कारण अक्सर वह सत्ता के बहरी कानों को साफ कर रही थी। 
दिल्ली पुलिस उस सफुरा को दिल्ली हिंसा का षड्यंत्रकारी मानती है जिसमे 
1984 के सिख दंगे के बाद सबसे अधिक लोगो की जान गयी है। .बहुतायत में मुस्लिम थे। ये वही दंगा है जिसमे "कपिल मिश्रा का बहुचर्चित नारा और पैदल मार्च में लगा था --गोली मारो सालो को देश के गद्दारों को प्रवेश वर्मा और बहुत अन्य थे। आजतक उनके खिलाफ एक भी FIR  नहीं हुआ है।

मजदूरों से किराया वसूलने की बात पर रितेश देशमुख ने किया ट्वीट, बोले- एक देश के तौर पर हमें..

मजदूरों से किराया वसूलने की बात पर रितेश देशमुख ने किया ट्वीट, बोले- एक देश के तौर पर हमें...


देशभर में कोरोना (Coronavirus) के कहर के बीच लॉकडाउन को 17 मई तक बढ़ा दिया है. इसके साथ ही शहरों में फंसे मजदूरों को वापस भेजने के लिए सरकार ने विशेष ट्रेन की व्यवस्था करने का फैसला किया है. हालांकि, यह कहा जा रहा है कि टिकट का पैसा खुद मजदूर वर्ग को ही देना होगा.


इस बात को लेकर हाल ही में बॉलीवुड एक्टर रितेश देशमुख (Riteish Deshmukh) ने ट्वीट किया है, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. अपने ट्वीट में रितेश देशमुख ने लिखा कि हमें एक देश के तौर पर उन प्रवासी मजदूरों का खर्च उठाना चाहिए जो अपने घर वापस लौट रहे हैं. 

Sunday, May 3, 2020

जफरुल इस्लाम खान ने कहा- मैंने माफी नहीं मांगी; न ही ट्वीट डिलीट किया, मैं अपने रुख पर कायम

जफरुल इस्लाम खान ने कहा- मैंने माफी नहीं मांगी; न ही ट्वीट डिलीट किया, मैं अपने रुख पर कायम

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान ने कहा है कि उन्होंने अपना ट्वीट हटाया नहीं है, वे अपने रुख पर कायम हैं. उन्होंने कहा है कि ''मीडिया के एक हिस्से ने यह गलत तरीके से बताया कि मैंने ट्वीट के लिए माफी मांगी है और उसे हटा दिया है.

 मैंने ट्वीट के लिए माफी नहीं मांगी है और उसे डिलीट नहीं किया है.''गौरतलब है कि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान ने सोशल मीडिया में लिखा था कि ''अगर भारत के मुसलमानों ने अरब और दुनिया के मुसलमानों से कट्टर/असहिष्णु लोगों के हेट कैंपेन, लिंचिंग और दंगों की शिकायत कर दी तो ज़लज़ला आ जाएगा.''

जफरुल इस्लाम खान ने ज़ाकिर नाइक का भी समर्थन किया था.उक्त बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने के बाद ज़फरुल इस्लाम ने शुक्रवार को माफी मांगी थी. कुवैत को लेकर किए गए ट्वीट में हिंदुस्तानी मुसलमानों के मामले को लेकर उन्होंने माफी मांगी थी. जफर इस्लाम ने कहा था कि ''मेरा इरादा गलत नहीं था. फिर भी किसी की भावना को ठेस पहुंची है तो मांफी मांगता हूं. हमारा देश हेल्थ इमरजेंसी से गुज़र रहा है ऐसे हालात में उस ट्वीट का गलत मतलब निकाला गया. उसके लिए खेद है.''

Saturday, May 2, 2020

मेरा अपना हिन्दूस्तान करोना वाइरस से जोझ रहा है?

मेरा अपना हिन्दूस्तान  करोना वाइरस  से जोझ रहा है?


लेकिन कुछ नेतागण इस घटना को हिन्दू मुसलिम का रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

लेकिन  जो हिन्दुस्तान की शांती और चैन को बरकरार रखना चाहते हैं वह इन लोगों की शज़िश को नाकाम करने की कोशिश भी कर रहे हैं।

और यही हर हिन्दूस्तानी का कर्तव्य  है।
आओ देश वासियों मिल कर यह पारण करते है की हिन्दूस्तान की शांती और चैन को हम हिन्दू मुसलिम मिलकर बरकरार रखें गे

अब यही देख लो क्या जरूरत थी किसी को गाली देना की 
लगता है अब कानून व्यवस्था से  लोग रहना ही नही चाहते है
 आज कल सरकारें  हिन्दू मुसलिम  ,दलित आदिवासी  जैसे मुद्दे लाकर अपनी रोटी सेंकने का कार्य कर रहे हैं।