Mahfooz khan

Saturday, May 9, 2020

सूरत में बीजेपी के नेता की दादागिरी, गांव भेजने के नाम पर 1.16 लाख वसूले, टिकट मांगा तो फोड़ा सिर

सूरत में बीजेपी के नेता की दादागिरी, गांव भेजने के नाम पर 1.16 लाख  वसूले, टिकट मांगा तो फोड़ा सिर
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ये है भाजपा का “गुजरात माडल” सूरत के भाजपा नेता ने मज़दूरों से 1.16 लाख रुपये किराये के नाम पर वसूल लिया,टिकट भी नही दिया, पैसा मँगाने पर पीटकर लहुलुहान कर दिया ये गरीब मज़दूर तुम्हें माफ़ नही करेगा l

प्रधानमंत्री के गुजरात से बेहद घृणित करने वाली खबर आ रही है। टीवी9 गुजरात चैनल ने अपनी एक रिपोर्ट प्रसारित की है जिसमें प्रवासी मजदूरों को टिकट बेचने में दलाली खाई जा रही है। रिपोर्ट में एक्सपोज किया है कि कैसे रेलवे अधिकारियों और सूरत नगरनिगम के अधिकारियों ने टिकट में दलाली के लिए साठगांठ की है जिसमें बीजेपी के लोकल नेता दलाली खा रहे हैं। राजेश वर्मा नाम से एक बीजेपी का नेता है जो म्युनिसिपेलिटी के काउंसलर अमित राजपूत के साथ मिलकर टिकट बेच रहा है। ये एक पूरा रैकेट है जो ब्लैक में टिकट बेचने का काम कर रहा है। गुजरात से झारखंड जाने वाली टिकटों को 2-2 हजार रुपए में बेचा जा रहा है जबकि इनकी सामान्य कीमत 1 हजार रुपए होती है।

खबर आ रही है कि मजदूरों के एक समूह से बीजेपी नेता राजेश वर्मा ने 1 लाख, 16 हजार रुपए ऐंठ लिए। जब एक प्रवासी मजदूर ने टिकटों के डबल पैसे लिए जाने का विरोध किया तो बीजेपी नेता ने मजदूर की इतनी पिटाई की कि सर ही फूट गया।

एक दिन पहले ही इकोनॉमिक टाइम्स पर एक रिपोर्ट आई थी जिसमें बताया गया था कि किस कदर ट्रैन टिकट हांसिल करने की पूरी प्रोसेज एक हेक्टिक प्रोसेज बन गई है। मजदूरों को पहले रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है, जिसका अप्रूवल रिसीविंग स्टेट के द्वारा दिया जाता है।सोचिए  मजदूर जो ईंट भट्ठों पर काम करते हैं, जो लेबर का काम करते हैं, मंडियों में काम करते हैं कैसे-कैसे रजिस्ट्रेशन करवा पा रहे होंगे? टिकट कन्फर्म हो जाने के बाद मजदूरों को मेडिकल भी करवाना होता है। मेडिकल करवाने में बड़े स्तर पर धांधली की खबरें भी मीडिया में आ रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया के बाद जाकर मजदूरों को ट्रेन की टिकट मिल पा रही है।

आप सोचिए महामारी के समय में, क्या मजदूरों को घर पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं बनती थी? 46 दिन से अधिक हो गया, बिना कमाए कितना पैसा बचा होगा मजदूरों पर? आप कल्पना भी नहीं कर सकते मजदूर क्या क्या बेचकर टिकट का इंतजाम कर पा रहे होंगे। ऊपर से सरकार के चमचों ने मजदूरों का खून पीना  भी शुरू कर दिया है। ये बेहद घृणा भरने वाली खबर है।


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