नाम - सफूरा ज़रगर
जामिया विश्वविद्यालय में रिसर्चर छात्रा, जिसके गर्भ में एक बच्चा है, सरकार ने UAPA terror कानून के बहाने गिरफ्तार कर रखा है सफूरा को कोई जमानत नहीं मिली है। स्टेटस ये है कि एक गर्भवती महिला तिहाड़ जेल के अंदर है।
कारण - संसदीय कानून CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन.....
जरूर आपको हिचकिचाहट होगी उसके समर्थन में लिखने में। .खैर छोडिय आवाज उठाने पर आप Anti-HINDU,राष्ट्रविरोधी इत्यादि से troll कर दिय जायेंगे क्योंकि वह स्त्री ( माँ) जो की कह सकते है , एक ऐसा विश्वविद्यालय से संबंध रखती है जिसे आज के परिवेश मे उसे देशद्रोही का अड्डा, हिन्दुविरोधी साबित करना चाहती है सत्ता औऱ उसके नुमाईंदे. यह वही विश्विद्यालय है जिसे एक वक़्त गाँधी जी भीख मांगकर भी चलाना चाहते थे. ख़ासकर उस विश्वविद्यालय
जिसके नाम का अर्थ ही आजादी होती है,वैसे भी #आजादी शब्द नासूर लगती
लोकतंत्र के कथित तानाशाही विचारधारा को। हाँ आपको एक और मुश्किल हो सकती है उसकी आवाज उठाने में क्योंकि उसका धर्म आपको शायद पता चल गया होगा-मुस्लिम। या फिर इस पितृसत्तात्मक समाज ये नहीं चाहता हो। औऱ यह भी की वह कश्मीर से है.. खबर तो यहां तक फैलाया गया है की अविवाहित होने के बावजूद
प्रेग्नेंट है. उनकी निकाह हो चुकी है. हाँ क्या दिक़्क़त है बिना विवाह के बच्चे होना. उसकी अपनी आजादी है. वह कोई 17 साल की नाबालिग नहीं है , वह वयस्क हैं और उसे संवैधानिक अधिकार भी हैं।
मुझे तनिक भी नहीं है डर इस बात की। . क्योंकि मैं #सफुरा में विश्वास रखता हूँ वो मुस्लिम हैं या हिन्दू उसमें नहीं .उसे रोजे के पहले दिन ही गिरफ्तार कर "तिहाड़ जेल" में डाल दिया गया है वजह यह थी की "सफुरा"उस कमिटी Jamia Coordination Committee (JCC) जिसने पिछले महीनो में शांतिपूर्ण आंदोलन कई सप्ताह तक किया था जनविरोधी,संविधानविरोधी CAA/NRC के खिलाफ। वह एक मौन की मुखर घोस थी जिसके कारण अक्सर वह सत्ता के बहरी कानों को साफ कर रही थी।
दिल्ली पुलिस उस सफुरा को दिल्ली हिंसा का षड्यंत्रकारी मानती है जिसमे
1984 के सिख दंगे के बाद सबसे अधिक लोगो की जान गयी है। .बहुतायत में मुस्लिम थे। ये वही दंगा है जिसमे "कपिल मिश्रा का बहुचर्चित नारा और पैदल मार्च में लगा था --गोली मारो सालो को देश के गद्दारों को प्रवेश वर्मा और बहुत अन्य थे। आजतक उनके खिलाफ एक भी FIR नहीं हुआ है।
जामिया विश्वविद्यालय में रिसर्चर छात्रा, जिसके गर्भ में एक बच्चा है, सरकार ने UAPA terror कानून के बहाने गिरफ्तार कर रखा है सफूरा को कोई जमानत नहीं मिली है। स्टेटस ये है कि एक गर्भवती महिला तिहाड़ जेल के अंदर है।
कारण - संसदीय कानून CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन.....
जरूर आपको हिचकिचाहट होगी उसके समर्थन में लिखने में। .खैर छोडिय आवाज उठाने पर आप Anti-HINDU,राष्ट्रविरोधी इत्यादि से troll कर दिय जायेंगे क्योंकि वह स्त्री ( माँ) जो की कह सकते है , एक ऐसा विश्वविद्यालय से संबंध रखती है जिसे आज के परिवेश मे उसे देशद्रोही का अड्डा, हिन्दुविरोधी साबित करना चाहती है सत्ता औऱ उसके नुमाईंदे. यह वही विश्विद्यालय है जिसे एक वक़्त गाँधी जी भीख मांगकर भी चलाना चाहते थे. ख़ासकर उस विश्वविद्यालय
जिसके नाम का अर्थ ही आजादी होती है,वैसे भी #आजादी शब्द नासूर लगती
लोकतंत्र के कथित तानाशाही विचारधारा को। हाँ आपको एक और मुश्किल हो सकती है उसकी आवाज उठाने में क्योंकि उसका धर्म आपको शायद पता चल गया होगा-मुस्लिम। या फिर इस पितृसत्तात्मक समाज ये नहीं चाहता हो। औऱ यह भी की वह कश्मीर से है.. खबर तो यहां तक फैलाया गया है की अविवाहित होने के बावजूद
प्रेग्नेंट है. उनकी निकाह हो चुकी है. हाँ क्या दिक़्क़त है बिना विवाह के बच्चे होना. उसकी अपनी आजादी है. वह कोई 17 साल की नाबालिग नहीं है , वह वयस्क हैं और उसे संवैधानिक अधिकार भी हैं।
मुझे तनिक भी नहीं है डर इस बात की। . क्योंकि मैं #सफुरा में विश्वास रखता हूँ वो मुस्लिम हैं या हिन्दू उसमें नहीं .उसे रोजे के पहले दिन ही गिरफ्तार कर "तिहाड़ जेल" में डाल दिया गया है वजह यह थी की "सफुरा"उस कमिटी Jamia Coordination Committee (JCC) जिसने पिछले महीनो में शांतिपूर्ण आंदोलन कई सप्ताह तक किया था जनविरोधी,संविधानविरोधी CAA/NRC के खिलाफ। वह एक मौन की मुखर घोस थी जिसके कारण अक्सर वह सत्ता के बहरी कानों को साफ कर रही थी।
दिल्ली पुलिस उस सफुरा को दिल्ली हिंसा का षड्यंत्रकारी मानती है जिसमे
1984 के सिख दंगे के बाद सबसे अधिक लोगो की जान गयी है। .बहुतायत में मुस्लिम थे। ये वही दंगा है जिसमे "कपिल मिश्रा का बहुचर्चित नारा और पैदल मार्च में लगा था --गोली मारो सालो को देश के गद्दारों को प्रवेश वर्मा और बहुत अन्य थे। आजतक उनके खिलाफ एक भी FIR नहीं हुआ है।

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